↙शक का कोई ईलाज नहीं होता,
↙जो यकीं करता है कभी नराज नहीं होता,
↙वो पूछते है हमसे कितना प्यार करते हो,
↙उन्हे क्या पता मौहाबत का हिसाब नहीं होता.
↙जो यकीं करता है कभी नराज नहीं होता,
↙वो पूछते है हमसे कितना प्यार करते हो,
↙उन्हे क्या पता मौहाबत का हिसाब नहीं होता.
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